अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उनकी आलोचना कर्मचारियों की नहीं, बल्कि वीजा प्रणाली और कंपनियों की थी। भारत के विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी।


अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है कि H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों को बंधुआ मजदूर कहना उनके शब्दों का गलत चुनाव था। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय द्वारा इस टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाने वाला बताए जाने के बाद वेंस का यह स्पष्टीकरण सामने आया है।

शनिवार को CBS न्यूज के एक टाउन हॉल में बोलते हुए वेंस ने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना का निशाना H-1B कर्मचारी नहीं, बल्कि अमेरिकी कंपनियां और मौजूदा वीजा प्रणाली थी।

गलती स्वीकारते हुए वेंस ने दी सफाई

टाउन हॉल के दौरान एक भारतीय-अमेरिकी नागरिक द्वारा पूछे गए सवाल पर जवाब देते हुए वेंस ने अपने शब्दों की जिम्मेदारी खुद ली। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों के चुनाव में कोई कमी रही है, तो उसकी जिम्मेदारी उनकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी H-1B वीजा धारकों की आलोचना नहीं थी, बल्कि उन कंपनियों की आलोचना थी जो कर्मचारियों को ऐसी स्थिति में रखती हैं।

वेंस ने तर्क दिया कि मौजूदा H-1B वीजा प्रणाली विदेशी कर्मचारियों को बेहद कमजोर स्थिति में डाल देती है, क्योंकि अमेरिका में उनका कानूनी दर्जा काफी हद तक उनके नियोक्ता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि नौकरी जाने के डर से कर्मचारी अपने बॉस की असहमतियों या शिकायतों को दबाने पर मजबूर हो सकते हैं, क्योंकि नौकरी छूटने के बाद उन्हें स्वदेश लौटना पड़ सकता है।

वेंस के अनुसार, यह व्यवस्था कंपनियों को कर्मचारियों पर अत्यधिक नियंत्रण और अनुचित शक्ति दे देती है।

परिवार का किया जिक्र

प्रवासन पर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए वेंस ने अपनी निजी जिंदगी और परिवार का भी उदाहरण दिया। उन्होंने अपनी पत्नी उषा वेंस के माता-पिता का जिक्र करते हुए कहा कि उनका परिवार दक्षिण भारत से अमेरिका आया था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अमेरिका में पैदा हुई और आज अमेरिका की सेकंड लेडी है। वेंस ने अपने ससुराल पक्ष के प्रति गर्व भी व्यक्त किया।

वेंस ने कहा कि उनका इरादा कभी भी प्रवासियों को अमानवीय रूप में पेश करने का नहीं रहा है। उन्होंने माना कि अमेरिका को विदेशी पेशेवरों का स्वागत करने और स्थानीय कामगारों के हितों की रक्षा करने के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।

विदेश मंत्रालय ने जताई थी आपत्ति

वेंस का यह बयान भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति के बाद आया है। विदेश मंत्रालय ने इस प्रकार की शब्दावली को अनुचित और आपत्तिजनक करार दिया था। भारत ने कहा था कि इस तरह के बयानों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार और अनुसंधान में भारतीय पेशेवरों के योगदान को नजरअंदाज किया गया है।

विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि प्रतिभाओं की निर्बाध आवाजाही भारत और अमेरिका दोनों के हित में है। इससे एक तरफ भारतीय पेशेवरों को वैश्विक अवसर मिलते हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी और कुशल कार्यबल मिलता है।

PERM प्रोग्राम के निलंबन का विवाद

इस महीने की शुरुआत में वेंस ने आरोप लगाया था कि आउटसोर्सिंग कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की तुलना में विदेशी पेशेवरों को 20,000 से 48,000 डॉलर तक कम वेतन देकर काम पर रख रही हैं। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन द्वारा आठ प्रमुख आईटी और टेक कंपनियों—TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe—को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से निलंबित किए जाने का दावा किया गया।

विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि PERM कार्यक्रम का निलंबन रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़ा एक प्रशासनिक कदम है। मंत्रालय के अनुसार, इसका वर्तमान H-1B वीजा धारकों या उनके आश्रितों की कानूनी स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ता और न ही इससे उनके वीजा अपने आप अमान्य होते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा हर साल जारी की जाने वाली कुल H-1B याचिकाओं में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक होने का दावा किया जाता है।

H-1B वीजा विवाद क्यों अहम है?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को कुछ विशेष व्यवसायों में विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। भारतीय आईटी पेशेवर लंबे समय से इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। इसलिए वीजा नीति, रोजगार की शर्तों और विदेशी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े बदलाव भारतीय पेशेवरों तथा तकनीकी कंपनियों के लिए खास मायने रखते हैं।

इस विवाद में एक ओर विदेशी कर्मचारियों की नौकरी और इमिग्रेशन स्थिति से जुड़ी चिंताएं हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार की सुरक्षा से जुड़े सवाल हैं। H-1B और PERM प्रक्रियाओं के बीच अंतर समझना भी जरूरी है, क्योंकि दोनों अलग-अलग उद्देश्यों से संबंधित हैं।