केंद्र के नए नियमों से जन्म से दिव्यांग बच्चों को भी पेंशन मिलने का रास्ता खुल सकता है; उत्तराखंड में 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर पहले से लागू है व्यवस्था।
केंद्र सरकार ने दिव्यांग पेंशन के लिए 80 प्रतिशत दिव्यांगता की सीमा को घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन उत्तराखंड में यह व्यवस्था पहले से ही लागू है। प्रदेश सरकार अभी तक 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर पेंशन देती है। मगर, केंद्र के नए नियमों के अनुसार अब जन्म से ही दिव्यांग बच्चों को भी पेंशन मिलने लगेगी। इस निर्णय से राज्य के हजारों दिव्यांग बच्चों को सीधा आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके लिए पात्रता संबंधी दिशा-निर्देश और राज्य में लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट होना जरूरी है।
समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा राज्य पोर्टल के वित्तीय वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में 90,750 दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रहे हैं। इनके लिए 81 करोड़ 78 लाख रुपये से अधिक की राशि दर्ज है। जिलेवार आंकड़ों में हरिद्वार 13,818 पेंशनधारकों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि ऊधम सिंह नगर 12,909 के साथ दूसरे स्थान पर है।
देहरादून में 11,877, टिहरी गढ़वाल में 8,842, अल्मोड़ा में 7,771, पौड़ी गढ़वाल में 7,409 और नैनीताल में 6,674 दिव्यांग पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी में 5,110, पिथौरागढ़ में 3,878, चमोली में 3,710, बागेश्वर में 3,371, चंपावत में 2,885 और रुद्रप्रयाग में 2,496 दिव्यांग पेंशन का लाभ ले रहे हैं। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने बुधवार को दिव्यांगों के हित में यह निर्णय लिया है। अब उत्तराखंड में नई व्यवस्था लागू होने और पात्रता संबंधी दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार है।
तीन माह के भीतर लागू हो सकता है नियम
अब तक केंद्रीय योजना के तहत 18 से 79 वर्ष की आयु के पात्र गंभीर या बहु-दिव्यांगता वाले लोगों को सहायता दी जाती थी। न्यूनतम आयु की शर्त समाप्त होने से जन्म से दिव्यांग बच्चे भी पात्रता की अन्य शर्तें पूरी करने पर लाभ ले सकेंगे। केंद्र सरकार के अनुसार, संशोधित नियमों को दिशा-निर्देश जारी होने के तीन महीने के भीतर लागू किया जाना है।
दिव्यांग पेंशन के लिए क्या हैं नियम?
उत्तराखंड में दिव्यांग पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाते हैं। योजना के लिए आयु सीमा 18 से 59 वर्ष निर्धारित है। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों की वार्षिक आय 48 हजार रुपये से कम होनी चाहिए।
बीपीएल परिवारों को 300 रुपये केंद्रीय और 1,200 रुपये राज्यांश के रूप में पेंशन मिलती है। अन्य पात्र लाभार्थियों को राज्य सरकार की ओर से 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। वहीं, पात्र कुष्ठ रोगियों के लिए 1,000 रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान है।
उत्तराखंड में जिलेवार दिव्यांग पेंशनधारक
| जिला | पेंशनधारकों की संख्या |
|---|---|
| हरिद्वार | 13,818 |
| ऊधम सिंह नगर | 12,909 |
| देहरादून | 11,877 |
| टिहरी गढ़वाल | 8,842 |
| अल्मोड़ा | 7,771 |
| पौड़ी गढ़वाल | 7,409 |
| नैनीताल | 6,674 |
| उत्तरकाशी | 5,110 |
| पिथौरागढ़ | 3,878 |
| चमोली | 3,710 |
| बागेश्वर | 3,371 |
| चंपावत | 2,885 |
| रुद्रप्रयाग | 2,496 |
दिव्यांग बच्चों के परिवारों को क्या करना चाहिए?
नए नियमों के तहत लाभ लेने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के लिए परिवारों को समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक अधिसूचना और राज्य के संबंधित कार्यालय से जानकारी लेनी चाहिए। पात्रता, आयु संबंधी शर्तों और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि होने के बाद ही आवेदन करना उचित होगा।
नई व्यवस्था से दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है। हालांकि, लाभ कब से और किन शर्तों पर मिलेगा, यह संबंधित दिशा-निर्देश जारी होने तथा राज्य में उनके क्रियान्वयन के बाद स्पष्ट होगा।